संविधान दिवस समारोह: न्यायपालिका में मौलिक कर्तव्यों के निर्वहन पर जोर

संविधान दिवस समारोह: न्यायपालिका में मौलिक कर्तव्यों के निर्वहन पर जोर
जनपद न्यायालय परिसर में संविधान दिवस के अवसर पर मंगलवार को भव्य और गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह की अध्यक्षता जनपद न्यायाधीश जे.पी. यादव ने की। कार्यक्रम में संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया गया तथा न्यायपालिका की जिम्मेदारियों, नागरिकों के मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों पर विस्तार से चर्चा हुई।
समारोह का संचालन चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल अमित कुमार मिश्रा ने किया। उन्होंने संविधान की मूल संरचना, उसकी प्रेरणा, उद्देश्यों तथा नागरिक जीवन में उसकी भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। मिश्रा ने कहा कि संविधान केवल एक विधिक दस्तावेज नहीं, बल्कि यह भारतीय गणराज्य की आत्मा है जो हर नागरिक को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के पालन की भी सीख देता है।

मुख्य वक्ता के रूप में जनपद न्यायाधीश जे.पी. यादव ने न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि न्यायपालिका का सबसे बड़ा दायित्व आम जनता के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने जोर दिया कि न्यायिक कार्यों का सम्पादन करते समय अधिकारीगण को अपने मौलिक कर्तव्यों को सदैव ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक के अधिकारों का हनन न हो, इसके लिए संवेदनशीलता और निष्पक्षता दोनों आवश्यक हैं।

कार्यक्रम में मौजूद सभी न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों, अधिवक्ताओं, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के सदस्यों, पैनल अधिवक्ताओं, मध्यस्थों तथा पराविधिक स्वयंसेवकों ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया। उपस्थित वक्ताओं ने मौलिक अधिकारों, मौलिक कर्तव्यों व नागरिक दायित्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला और लोगों को संविधान के प्रति जागरूक रहने की अपील की।

कार्यक्रम में मॉडल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, महामंत्री सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, न्यायिक कर्मचारी और स्वयंसेवक उपस्थित रहे। समारोह का समापन संविधान की मूल भावना को जीवन में आत्मसात करने के संकल्प के साथ किया गया।
रिपोर्ट राकेश दिवाकर/विपिन दिवाकर 
   9648518828,9454139866

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