श्रमिकों को सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा देने में आगे प्रदेश सरकार, 40 से अधिक निर्माण कार्यों को किया गया सूचीबद्ध
लखनऊ। प्रदेश सरकार श्रमिकों और कामगारों के सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर गंभीर है। भवन एवं सन्निर्माण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं। इसी क्रम में प्रदेश में उत्तर प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण (नियोजन तथा सेवाशर्त विनियमन) नियमावली लागू की गई है तथा उ.प्र. भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का गठन कर विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को गति दी जा रही है।
18 से 60 वर्ष आयु वर्ग के वे श्रमिक जिन्होंने एक वर्ष में 90 दिन या अधिक निर्माण कार्य किया है, वे इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण के पात्र हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि 40 से अधिक प्रकार के निर्माण कार्यों को इस सूची में शामिल किया गया है, जिनमें बेल्डिंग, बढ़ईगिरी, कुआँ खोदना, राजमिस्त्री, प्लम्बरिंग, इलेक्ट्रिक वर्क, टाइल्स लगाने का कार्य, सड़कों का निर्माण, मशीनरी संचालन, सुरंग निर्माण, लोहार कार्य, गाद निकालना, खनन, स्प्रे वर्क सहित कई अन्य कार्य शामिल हैं। इतना ही नहीं, पत्थर काटने-पीसने से लेकर अग्निशमन प्रणाली, मॉड्यूलर किचन की स्थापना, पुल व बांध निर्माण से संबंधित कार्य भी इसमें सम्मिलित हैं।
पंजीकरण के लिए श्रमिक को मात्र ₹20 आवेदन शुल्क और ₹20 प्रथम वर्ष का अंशदान देना होता है। वह एक साथ तीन वर्ष का अंशदान भी जमा कर सकता है। आवेदन के साथ दो पासपोर्ट फोटो, नियोजन प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और बैंक पासबुक की प्रति अनिवार्य है। अधिनियम के दायरे में आने वाले सभी निर्माण स्थलों, जहाँ एक दिन में 10 या इससे अधिक श्रमिक कार्यरत हों, का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। वहीं आवासीय भवनों में यह प्रावधान 10 लाख रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण पर लागू है।
उ.प्र. भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम 1996 के अनुसार, अधीनस्थ सभी भवनों व निर्माणों की लागत का 1 प्रतिशत उपकर के रूप में लिया जाता है, जिसे पूर्ण रूप से श्रमिक कल्याण योजनाओं पर व्यय किया जाता है। इसी उपकर से प्रदेश में संचालित सभी योजनाओं को वित्तीय मदद प्रदान की जाती है।
राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना, निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना, कन्या विवाह सहायता, कौशल विकास तकनीकी उन्नयन योजना, गंभीर बीमारी सहायता योजना, महात्मा गांधी पेंशन योजना, संत रविदास शिक्षा सहायता योजना, अटल आवासीय विद्यालय योजना सहित कई अन्य प्रमुख योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के माध्यम से लाखों निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों को करोड़ों रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
सरकार का दावा है कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, उनके परिवारों को सुरक्षा और सामाजिक सम्मान दिलाना प्राथमिकता है। पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक श्रमिक इसका लाभ उठा सकें।
इस संबंध में जानकारी देते हुए के.एल. चौधरी, सेवानिवृत्त उपनिदेशक सूचना, ने कहा कि प्रदेश सरकार श्रमिक वर्ग को मजबूत करने के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रही है और आगे भी ये प्रयास जारी रहेंगे।
चीफ एडिटर- राकेश दिवाकर(Bharat TV Gramin) 9648518828,9454139866
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