किसानों के शोषण और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे चकबंदी लेखपाल दीपक पटेल, हटाने के आश्वासन के बावजूद कार्रवाई शून्य प्रदर्शन की चेतावनी

किसानों के शोषण और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे चकबंदी लेखपाल दीपक पटेल, हटाने के आश्वासन के बावजूद कार्रवाई शून्य प्रदर्शन की चेतावनी

कौशांबी चायल तहसील क्षेत्र के मखऊपुर गांव में तैनात चकबंदी लेखपाल दीपक पटेल एक बार फिर सुर्खियों में गंभीर आरोपों के घेरे में आ गए हैं। किसानों का आरोप है कि लेखपाल द्वारा लगातार अवैध उगाही, मानसिक उत्पीड़न और भ्रष्टाचार किया जा रहा है। 
किसानों का कहना है कि लेखपाल दीपक पटेल द्वारा सरकारी कार्यों के नाम पर किसानों से जबरन धन वसूली की गांव के लोगों को बैठाकर की जाती है। डरा धमका कर जिससे पीड़ित किसानों में रोष है।

स्थानीय किसानों ने बताया कि ग्राम मखऊपुर चकबंदी में गांव होने से गाटों का सेक्टर बनाने का कर चल रहा है लेखपाल कार्यालय में बैठे गांव के लोगों के माध्यम से लेनदेन कर कहा जाता है कि यदि रुपए नहीं दोगे तो आपके खेतों को इधर-उधर दूर कर दिया जाएगा फिर बाद में पछताओगे।
कुछ किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लेखपाल की कार्यशैली से क्षेत्र में भय का माहौल है। छोटे और सीमांत किसान सबसे अधिक परेशान हैं, क्योंकि वे प्रशासनिक दबाव के कारण खुलकर शिकायत भी नहीं कर पाते।
किसानों का यह भी आरोप है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे यह संदेह और गहरा होता जा रहा है कि कहीं न कहीं लेखपाल को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।


किसान यूनियन द्वारा किए गए धरना प्रदर्शन के बाद उपजिलाधिकारी महोदय ने किसानों को आश्वस्त किया था कि लेखपाल दीपक पटेल को हटा दिया जाएगा और मामले की जांच कराई जाएगी। इस आश्वासन के बाद किसानों ने अस्थायी रूप से धरना समाप्त कर दिया था, लेकिन कई दिन बीत जाने के बावजूद लेखपाल को अब तक नहीं हटाया गया।
किसानों का कहना है कि प्रशासन के आश्वासन केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। लेखपाल अब भी उसी गांव में तैनात है और कथित रूप से पहले की तरह कार्य कर रहा है। इससे किसानों में भारी नाराजगी है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठ रहे।
इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि लेखपाल के खिलाफ पहले से शिकायतें मौजूद थीं, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या भ्रष्टाचार और किसानों के शोषण को नजरअंदाज किया जा रहा है? ऐसे कई सवाल अब आम जनमानस में चर्चा का विषय बन चुके हैं।
किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही लेखपाल को हटाकर निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो वे दोबारा धरना प्रदर्शन करेंगे। इस बार आंदोलन को और व्यापक रूप देने की चेतावनी भी दी गई है।
किसान यूनियन की चेतावनी
किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि प्रशासन की उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जायेगी ।दीपक पटेल को तत्काल नहीं हटाया गया, तो किसान अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
अब देखना यह है कि प्रशासन किसानों की पीड़ा को गंभीरता से लेता है या फिर एक और आंदोलन की नींव रखी जा रही है।

ब्यूरो रिपोर्ट राकेश दिवाकर/विपिन दिवाकर (विश्व सहारा हिंदी दैनिक व Bharat TV Gramin
9648518828 9454139866

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