महिला सुरक्षा और बाल अधिकारों की ढाल है पॉश एक्ट, सुरक्षित बाल अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि-अमित मिश्रा

महिला सुरक्षा और बाल अधिकारों की ढाल है पॉश एक्ट, सुरक्षित बाल अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि-अमित मिश्रा


कौशाम्बी । कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण प्रदान करने में पॉश एक्ट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह कानून महिलाओं को लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण प्रदान करता है और उन्हें न्याय की मजबूत कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराता है। यह बात चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल अमित मिश्रा ने विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर को संबोधित करते हुए कही।
दिनांक 5 जनवरी 2026 को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कौशाम्बी के तत्वावधान में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, जानकीपुर, चायल में शोषण के विरुद्ध अधिकार, पॉश एक्ट एवं बच्चों के अधिकार विषय पर एक दिवसीय विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना एवं शोषण के विरुद्ध सशक्त बनाना रहा।

कार्यक्रम में अधिवक्ता संदीप द्विवेदी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि किसी बच्चे के साथ शारीरिक, मानसिक या लैंगिक दुर्व्यवहार होता है तो उसे चुप नहीं रहना चाहिए। ऐसे मामलों में तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय, परा विधिक स्वयंसेवक (पीएलवी), स्वास्थ्य सेवा प्रदाता, स्थानीय बाल कल्याण एजेंसी, पुलिस विभाग या टोल फ्री हेल्पलाइन नंबरों के माध्यम से शिकायत करनी चाहिए। तहसील विधिक सहायता क्लीनिक में कार्यरत पीएलवी से भी संपर्क किया जा सकता है।

डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने बाल अधिकारों और शोषण के विरुद्ध कानूनों की जानकारी देते हुए बताया कि संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अधिवेशन, किशोर न्याय अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम और राष्ट्रीय बाल नीति के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु का प्रत्येक व्यक्ति बालक की श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि बच्चों को मारना, चिढ़ाना, डराना, मजदूरी कराना, अश्लील सामग्री दिखाना, गाली-गलौज करना, तंग करना या यौन अपराध करना गंभीर अपराध हैं।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 शोषण के विरुद्ध अधिकार प्रदान करते हैं, जबकि अनुच्छेद 45 में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है। बाल श्रम निषेध अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से खतरनाक कार्य कराना दंडनीय अपराध है।
महिला कल्याण विभाग के संरक्षण अधिकारी अजीत कुमार ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, स्पॉन्सरशिप योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना एवं मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की जानकारी दी।

मुख्य वक्ता अमित मिश्रा ने कहा कि बच्चों के अधिकारों का हनन उनके मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास को गहराई से प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम 2013 (पॉश एक्ट) सरकारी और निजी सभी संस्थानों में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने, शिकायत समितियों के गठन और जागरूकता कार्यक्रमों पर जोर देता है, जिससे पीड़ित महिलाएं बिना भय के शिकायत कर सकें।

शिविर में 1090, 1098, 181 हेल्पलाइन नंबरों और 15100 विधिक सेवा टोल फ्री नंबर की जानकारी दी गई। अंत में छात्राओं को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत शपथ दिलाई गई।

धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय की अधीक्षिका श्रीमती ममता अंजली ने किया। इस अवसर पर शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
रिपोर्ट चीफ एडिटर- राकेश दिवाकर/विपिन दिवाकर 9648518828,9454139866

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